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श्लोक 5.28.13  |
सहस्रमेकं निष्काणां रुक्मिणा विजितो बल:।
द्वितीयेऽपि पणे चान्यत्सहस्रं रुक्मिणाजित:॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| रुक्मी ने पहली चाल में बलरामजी से एक हजार हार और दूसरी चाल में एक हजार हार जीत लिए॥13॥ |
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| Rukmi won a thousand necklaces from Balarama in his first move and another thousand necklaces in his second move.॥ 13॥ |
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