श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 27: प्रद्युम्न-हरण तथा शम्बर-वध  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.27.32 
चिरं नष्टेन पुत्रेण सङ्गतां प्रेक्ष्य रुक्मिणीम्।
अवाप विस्मयं सर्वो द्वारवत्यां तदा जन:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस समय द्वारकापुरी के सभी नागरिक रुक्मिणी का अपने बहुत समय से खोए हुए पुत्र से मिलन देखकर आश्चर्यचकित हो गए ॥ 32॥
 
At that time, all the citizens of Dwarakapuri were astonished to see Rukmini's union with her long lost son. ॥ 32॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे सप्तविंशोऽध्याय:॥ २७॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)