श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 27: प्रद्युम्न-हरण तथा शम्बर-वध  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  5.27.10-11 
अयं समस्तजगत: स्थितिसंहारकारिण:।
शम्बरेण हृतो विष्णोस्तनय: सूतिकागृहात्॥ १०॥
क्षिप्तस्समुद्रे मत्स्येन निगीर्णस्ते गृहं गत:।
नररत्नमिदं सुभ्रु विस्रब्धा परिपालय॥ ११॥
 
 
अनुवाद
"हे सुन्दर भौंहों वाले! यह सम्पूर्ण जगत के पालनहार और संहारक भगवान विष्णु का पुत्र है। इसे शम्बरासुर ने प्रसव कक्ष से हरण करके समुद्र में फेंक दिया था। वहाँ इस मछली ने इसे निगल लिया और अब यह इसके द्वारा आपके घर में आ पहुँचा है। आपको इस पुरुष रत्न का विश्वासपूर्वक पालन करना चाहिए।"॥10-11॥
 
"O one with beautiful brows! This is the son of Lord Vishnu, the preserver and destroyer of the entire universe. He was kidnapped from the delivery room by Shambarasur and thrown into the ocean. There this fish swallowed him and now he has come to your house through it. You should take care of this gem of a man with trust."॥10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)