श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 23: द्वारका-दुर्गकी रचना, कालयवनका भस्म होना तथा मुचुकुन्दकृत भगवत्स्तुति  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.23.43 
त्वामनाराध्य जगतां सर्वेषां प्रभवास्पदम्।
शाश्वती प्राप्यते केन परमेश्वर निर्वृति:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे परमेश्वर! सम्पूर्ण जगत के मूल, आपकी भक्ति किए बिना कौन शाश्वत शांति प्राप्त कर सकता है?॥ 43॥
 
O Supreme Lord! Who can attain eternal peace without worshiping You, the origin of the entire universe?॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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