श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 23: द्वारका-दुर्गकी रचना, कालयवनका भस्म होना तथा मुचुकुन्दकृत भगवत्स्तुति  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  5.23.35-36 
त्वत्तोऽमरास्सपितरो यक्षगन्धर्वकिन्नरा:।
सिद्धाश्चाप्सरसस्त्वत्तो मनुष्या: पशव: खगा:॥ ३५॥
सरीसृपा मृगास्सर्वे त्वत्तस्सर्वे महीरुहा:।
यच्च भूतं भविष्यं च किञ्चिदत्र चराचरम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तुमसे ही देवता, पितर, यक्ष, गन्धर्व, किन्नर, सिद्ध और अप्सराएँ उत्पन्न हुई हैं। तुमसे ही मनुष्य, पशु, पक्षी, सरीसृप और मृग आदि उत्पन्न हुए हैं। तुमसे ही समस्त वृक्ष तथा भूत और भविष्य में जो कुछ भी है, जड़ और चेतन जगत् उत्पन्न हुआ है॥ 35-36॥
 
From you, the gods, ancestors, Yakshas, ​​Gandharvas, Kinnars, Siddhas and Apsaras have originated. From you, humans, animals, birds, reptiles and deer etc. have originated. From you, all the trees and whatever is there in the past and future, animate and inanimate world, has originated.॥ 35-36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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