vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 23: द्वारका-दुर्गकी रचना, कालयवनका भस्म होना तथा मुचुकुन्दकृत भगवत्स्तुति
»
श्लोक 29
श्लोक
5.23.29
तथा हि सजलाम्भोदनादधीरतरं तव।
वाक्यं नमति चैवोर्वी युष्मत्पादप्रपीडिता॥ २९॥
अनुवाद
हे प्रभु! आपकी वाणी गीले बादल की गर्जना के समान गम्भीर है और आपके चरणों से पीड़ित होकर पृथ्वी झुक गई है।
O Lord! Your voice is as deep as the roar of a wet cloud and the earth has bowed down being afflicted by your feet.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×