| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 23: द्वारका-दुर्गकी रचना, कालयवनका भस्म होना तथा मुचुकुन्दकृत भगवत्स्तुति » श्लोक 24 |
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| | | | श्लोक 5.23.24  | एवं दग्ध्वा स तं पापं दृष्ट्वा च मधुसूदनम्।
कस्त्वमित्याह सोऽप्याह जातोऽहं शशिन: कुले।
वसुदेवस्य तनयो यदोर्वंशसमुद्भव:॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार पापी कालयवन को जलाकर राजा मुचुकुन्द ने श्रीमधुसूदन को देखकर पूछा, "आप कौन हैं?" तब भगवान् बोले, "मैं चन्द्रवंश में यदुकुल में वसुदेव के पुत्र के रूप में उत्पन्न हुआ हूँ।"॥ 24॥ | | | | Having thus burnt the sinful Kalayavana, King Muchukunda, on seeing Sri Madhusudan, asked, "Who are you?" Then the Lord said, "I was born in the Yadu clan under the Chandravansh as the son of Vasudeva."॥ 24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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