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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन
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श्लोक 9
श्लोक
5.21.9
उग्रसेनं ततो बन्धान्मुमोच मधुसूदन:।
अभ्यसिञ्चत्तदैवैनं निजराज्ये हतात्मजम्॥ ९॥
अनुवाद
तत्पश्चात् श्री मधुसूदन ने उग्रसेन को बंधन से मुक्त किया और उसके पुत्र की मृत्यु के पश्चात् उसे अपने सिंहासन पर अभिषिक्त किया ॥9॥
Thereafter, Shri Madhusudan freed Ugrasena from bondage and after the death of his son, anointed him to his throne. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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