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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन
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श्लोक 7
श्लोक
5.21.7
कंसपत्न्यस्तत: कंसं परिवार्य हतं भुवि।
विलेपुर्मातरश्चास्य दु:खशोकपरिप्लुता:॥ ७॥
अनुवाद
उस समय कंस की पत्नियाँ और माताएँ भूमि पर पड़े हुए मृत कंस को घेरकर दुःख और शोक से विलाप करने लगीं।
At that time the wives and mothers of Kansa surrounded the dead Kansa lying on the ground and began to lament in grief and sorrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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