श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  5.21.30-31 
तं पाञ्चजन्यमापूर्य गत्वा यमपुरं हरि:।
बलदेवश्च बलवाञ्जित्वा वैवस्वतं यमम्॥ ३०॥
तं बालं यातनासंस्थं यथापूर्वशरीरिणम्।
पित्रे प्रदत्तवान‍्कृष्णो बलश्च बलिनां वर:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पाञ्चजन्य शंख बजाते हुए श्री कृष्णचन्द्र और महाबली बलरामजी यमपुर गए और सूर्यपुत्र यमराज को जीतकर यम की यातना सहने के पश्चात् बालक के शरीर को पुनः स्थापित करके उसे उसके पिता को दे दिया ॥30-31॥
 
Thereafter, blowing the Panchajanya conch, Shri Krishnachandra and the mighty Balram went to Yampur and after conquering Surya's son Yama, after suffering Yama's torture, restored the body of the child and gave him back to his father. 30-31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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