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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन
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श्लोक 3
श्लोक
5.21.3
कुर्वतां याति य: कालो मातापित्रोरपूजनम्।
तत्खण्डमायुषो व्यर्थमसाधूनां हि जायते॥ ३॥
अनुवाद
माता-पिता की सेवा के बिना जो समय बीतता है, वह केवल अधर्मियों के जीवन का व्यर्थ भाग है ॥3॥
The time which passes without serving parents is a wasted part of the life of only the unrighteous. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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