श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  5.21.23-24 
साङ्गांश्च चतुरो वेदान‍्सर्वशास्त्राणि चैव हि।
अस्त्रग्राममशेषं च प्रोक्तमात्रमवाप्य तौ॥ २३॥
ऊचतुर्व्रिया ते दातव्या गुरुदक्षिणा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों ने एक ही श्रवण में चारों वेदों को उनके भागों सहित, सम्पूर्ण शास्त्रों को तथा सब प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों का ज्ञान प्राप्त कर लिया और फिर अपने गुरु से बोले, “बताइए, मैं आपको क्या गुरुदक्षिणा दूँ?”॥23-24॥
 
Both of them acquired the four Vedas with their parts, the entire Shastra (scriptures) and all kinds of knowledge of weapons in just one listen and then said to their Guru, “Tell me, what Gurudakshina should I give you?”॥ 23-24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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