श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  5.21.18-19 
विदिताखिलविज्ञानौ सर्वज्ञानमयावपि।
शिष्याचार्यक्रमं वीरौ ख्यापयन्तौ यदूत्तमौ॥ १८॥
ततस्सान्दीपनिं काश्यमवन्तिपुरवासिनम्।
विद्यार्थं जग्मतुर्बालौ कृतोपनयनक्रमौ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समस्त विद्याओं को जानने वाले तथा सर्वविद्याओं से युक्त होने पर भी वीर श्रीकृष्ण और बलरामजी गुरु-शिष्य सम्बन्ध को प्रकट करने के लिए उपनयन संस्कार के पश्चात् ज्ञान प्राप्त करने के लिए काशी में जन्मे अवन्तिपुर के ऋषि सान्दीपनि के पास गए। ॥18-19॥
 
Thereafter, despite knowing all the sciences and being endowed with all-knowledge, the brave Krishna and Balarama went to the sage Sandipani of Avantipur, who was born in Kashi, to acquire knowledge after the Upanayana ceremony in order to reveal the Guru-disciple relationship. ॥18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)