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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन
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श्लोक 17
श्लोक
5.21.17
वायुना चाहृतां दिव्यां सभां ते यदुपुङ्गवा:।
बुभुजुस्सर्वरत्नाढॺां गोविन्दभुजसंश्रया:॥ १७॥
अनुवाद
वह यदुश्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्णचन्द्र की भुजाओं पर आश्रित होकर वायु द्वारा लाई हुई सम्पूर्ण दिव्य सभा का आनन्द लेने लगा॥17॥
He started enjoying the entire divine gathering brought by the wind, dependent on the arms of Lord Krishnachandra, the best of Yadus. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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