श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.21.15 
कृष्णो ब्रवीति राजार्हमेतद्रत्नमनुत्तमम्।
सुधर्माख्यसभा युक्तमस्यां यदुभिरासितुम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कृष्णचन्द्र ने आज्ञा दी है कि यह सुधर्मा सभा नामक परम मूल्यवान रत्न राजा के ही योग्य है और इसमें यादवों का निवास करना उचित है॥ 15॥
 
Krishnachandra has commanded that this most precious jewel called Sudharma Sabha is worthy only of a king and it is appropriate for the Yadavas to reside in it.॥ 15॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas