vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन
»
श्लोक 14
श्लोक
5.21.14
गच्छेदं ब्रूहि वायो त्वमलं गर्वेण वासव।
दीयतामुग्रसेनाय सुधर्मा भवता सभा॥ १४॥
अनुवाद
"हे वायु! तुम जाकर इन्द्र से कहो कि हे वासव! तुम अपना व्यर्थ अभिमान त्यागकर उग्रसेन को सुधर्मा नामक अपनी सभा दे दो। 14.
"O Vaio! You go and tell Indra that O Vasava! Giving up your useless pride, you give Ugrasena your assembly named Sudharma. 14.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×