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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन
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श्लोक 14
श्लोक
5.21.14
गच्छेदं ब्रूहि वायो त्वमलं गर्वेण वासव।
दीयतामुग्रसेनाय सुधर्मा भवता सभा॥ १४॥
अनुवाद
"हे वायु! तुम जाकर इन्द्र से कहो कि हे वासव! तुम अपना व्यर्थ अभिमान त्यागकर उग्रसेन को सुधर्मा नामक अपनी सभा दे दो। 14.
"O Vaio! You go and tell Indra that O Vasava! Giving up your useless pride, you give Ugrasena your assembly named Sudharma. 14.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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