श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.21.13 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्त्वा सोऽस्मरद्वायुमाजगाम च तत्क्षणात्।
उवाच चैनं भगवान‍्केशव: कार्यमानुष:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - उग्रसेन से ऐसा कहकर धर्मसंस्थापन के उद्देश्य से मनुष्यरूप धारण करने वाले भगवान श्रीकृष्ण ने वायुदेव का स्मरण किया और वे उसी क्षण वहाँ प्रकट हो गए। तब भगवान ने उनसे कहा -॥13॥
 
Shri Parashar ji said - Having said this to Ugrasen, Lord Krishna, who had assumed the form of a human being for the purpose of establishing Dharma, remembered Vayu and he appeared there at that very moment. Then the Lord said to him -॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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