श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 21: उग्रसेनका राज्याभिषेक तथा भगवान् का विद्याध्ययन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.21.1 
श्रीपराशर उवाच
तौ समुत्पन्नविज्ञानौ भगवत्कर्मदर्शनात्।
देवकीवसुदेवौ तु दृष्ट्वा मायां पुनर्हरि:।
मोहाय यदुचक्रस्य विततान स वैष्णवीम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - वसुदेव और देवकी को अपने अद्भुत कर्मों के कारण विज्ञान से युक्त देखकर भगवान ने यदुवंशियों को मोहित करने के लिए अपनी वैष्णवी माया का विस्तार किया॥1॥
 
Shri Parasharji said - Seeing that Vasudev and Devaki were born with science due to their amazing deeds, God expanded his Vaishnavi Maya to fascinate the Yaduvanshis. 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas