श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  5.20.83 
नन्दोऽपि गृह्यतां पापो निर्गलैरायसैरिह।
अवृद्धार्हेण दण्डेन वसुदेवोऽपि वध्यताम्॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
पापी नन्द को लोहे की जंजीरों से बाँधकर पकड़ लो। तथा वसुदेव को बूढ़ों के योग्य दण्ड न देकर मार डालो।
 
Capture the sinner Nanda by binding him in iron chains. Also kill Vasudeva by inflicting upon him the punishment unworthy of old men. 83.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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