श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  5.20.78 
सोऽप्येनं मुष्टिना मूर्ध्नि वक्षस्याहत्य जानुना।
पातयित्वा धरापृष्ठे निष्पिपेष गतायुषम्॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
बलराम ने उसके सिर पर मुट्ठियों से और छाती पर घुटनों से प्रहार किया तथा उस वृद्ध राक्षस को जमीन पर पटककर कुचल दिया।
 
Balarama attacked him on the head with his fists and on the chest with his knees and threw the old demon on the ground and trampled him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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