श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  5.20.68 
अशस्त्रमतिघोरं तत्तयोर्युद्धं सुदारुणम्।
बलप्राणविनिष्पाद्यं समाजोत्सवसन्निधौ॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उस सामाजिक उत्सव के निकट ही बल और प्राणशक्ति से ही लड़ा जाने वाला अत्यन्त भयंकर और भयंकर निःशस्त्र युद्ध हुआ ॥68॥
 
Thus, near that social festival, a very fierce and terrible unarmed battle took place, fought only with strength and life force. ॥ 68॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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