श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.20.62 
नियुद्धप्राश्निकानां तु महानेष व्यतिक्रम:।
यद‍्बालबलिनोर्युद्धं मध्यस्थैस्समुपेक्ष्यते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
कुश्ती दंगल के निर्णायकों की ओर से यह बहुत बड़ा अन्याय है कि वे मध्यस्थ होते हुए भी इन बच्चों और बलवान पहलवानों के बीच लड़ाई करवा रहे हैं।
 
It is a great injustice on the part of the judges of the wrestling match that despite being mediators they are making the fight take place between these children and strong wrestlers. 62.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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