श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.20.6 
श्रीकृष्ण उवाच
सुगन्धमेतद्राजार्हं रुचिरं रुचिरानने।
आवयोर्गात्रसदृशं दीयतामनुलेपनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - हे सुमुखी! यह सुन्दर एवं सुगन्धित अभिषेक तो राजा के लिए ही उपयुक्त है। यदि मेरे शरीर के लिए भी कोई उपयुक्त अभिषेक हो, तो मुझे दे दो॥6॥
 
Shri Krishna said - O Sumukhi! This beautiful and fragrant anointment is fit only for a king. If there is any anointment suitable for my body too, then give it to me. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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