श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  5.20.57 
किं न पश्यसि दुग्धेन्दुमृणालधवलाकृतिम्।
बलभद्रमिमं नीलपरिधानमुपागतम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
[दूसरा0—] “अरे ! क्या तुम इन दूधिया, चन्द्रमा या कमल के समान बलदेवजी को नीलाम्बर धारण किए हुए आते हुए नहीं देखते?’’ 57॥
 
[Second 0—] “Hey! Don't you see this milky, moon-like or lotus-like Baldevji coming wearing Nilambar?'' 57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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