श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.20.56 
श्रीवत्साङ्कं महद्धाम बालस्यैतद्विलोक्यताम्।
विपक्षक्षपणं वक्षो भुजयुग्मं च भामिनि॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
[एक स्त्री बोली-] "हे भामिनी! इस बालक का वक्षस्थल श्रीवत्संक से भरा हुआ, लक्ष्मी आदि का आश्रय है और शत्रुओं को परास्त करने वाली इसकी दो भुजाएँ हैं!''॥56॥
 
[A woman said –] “O Bhamini! Look at this child's chest filled with Shrivatsanka, the shelter of Lakshmi etc. and his two arms that defeat the enemies!''॥ 56॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas