श्रीवत्साङ्कं महद्धाम बालस्यैतद्विलोक्यताम्।
विपक्षक्षपणं वक्षो भुजयुग्मं च भामिनि॥ ५६॥
अनुवाद
[एक स्त्री बोली-] "हे भामिनी! इस बालक का वक्षस्थल श्रीवत्संक से भरा हुआ, लक्ष्मी आदि का आश्रय है और शत्रुओं को परास्त करने वाली इसकी दो भुजाएँ हैं!''॥56॥
[A woman said –] “O Bhamini! Look at this child's chest filled with Shrivatsanka, the shelter of Lakshmi etc. and his two arms that defeat the enemies!''॥ 56॥