श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 54-55
 
 
श्लोक  5.20.54-55 
सख्य: पश्यत कृष्णस्य मुखमत्यरुणेक्षणम्।
गजयुद्धकृतायासस्वेदाम्बुकणिकाचितम्॥ ५४॥
विकासिशरदम्भोजमवश्यायजलोक्षितम्।
परिभूय स्थितं जन्म सफलं क्रियतां दृश:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
[वे आपस में कहने लगे—] "हे सखाओं! लाल नेत्रों वाले श्री कृष्णचन्द्र के सुन्दर मुख को देखो, जो कुवलयापीड़ से युद्ध करने के परिश्रम से अत्यन्त पसीने से तर हो रहे हैं और हिमकणों से युक्त शरद ऋतु के कमल पुष्प को लज्जित कर रहे हैं। हे! इसे देखकर अपने नेत्रों को सफल करो।" ॥54-55॥
 
[They started saying to each other—] "O friends! Look at the beautiful face of Shri Krishnachandra with red eyes, who is sweating profusely due to the exertion of fighting with Kuvalayapeed and is putting to shame the lotus flower of autumn, sprinkled with snowflakes. O! Make your eyes successful by seeing this." ॥ 54-55॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas