vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध
»
श्लोक 47
श्लोक
5.20.47
अरिष्टो धेनुक: केशी लीलयैव महात्मना।
निहता येन दुर्वृत्ता दृश्यतामेष सोऽच्युत:॥ ४७॥
अनुवाद
जिस महात्मा ने अपनी लीला से अरिष्टासुर, धेनुकासुर और केशी आदि दुष्ट दैत्यों का वध किया था, वही अच्युत है।
The great soul who had killed the wicked demons like Arishtasura, Dhenukaasur and Keshi by his divine play; behold, this is that Achyuta. 47.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas