श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.20.44 
हाहाकारो महाञ्जज्ञे महारङ्गे त्वनन्तरम्।
कृष्णोऽयं बलभद्रोऽयमिति लोकस्य विस्मय:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उस समय महान् रंगशालामें बड़ा कोलाहल मच गया और सब लोग आश्चर्यसे भर गए, ‘यह कृष्ण हैं, यह बलभद्र हैं ॥ 44॥
 
At that time there was a great uproar in the great amphitheatre and all the people were filled with astonishment, 'This is Krishna, this is Balabhadra.' ॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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