श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.20.2 
तामाह ललितं कृष्ण: कस्येदमनुलेपनम्।
भवत्या नीयते सत्यं वदेन्दीवरलोचने॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब श्रीकृष्ण ने उससे विनोदपूर्वक कहा, "हे कमलनेत्र! सच-सच बताओ, यह मलहम तुम किसके लिए ले जा रही हो?"॥2॥
 
Then Shri Krishna said to her playfully, "Oh lotus-eyed one! Tell me the truth, for whom are you taking this ointment?"॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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