| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध » श्लोक 19-21 |
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| | | | श्लोक 5.20.19-21  | कंस उवाच
गोपालदारकौ प्राप्तौ भवद्भ्यां तु ममाग्रत:।
मल्लयुद्धेन हन्तव्यौ मम प्राणहरौ हि तौ॥ १९॥
नियुद्धे तद्विनाशेन भवद्भ्यां तोषितो ह्यहम्।
दास्याम्यभिमतान्कामान्नान्यथैतौ महाबलौ॥ २०॥
न्यायतोऽन्यायतो वापि भवद्भ्यां तौ ममाहितौ।
हन्तव्यौ तद्वधाद्राज्यं सामान्यं वां भविष्यति॥ २१॥ | | | | | | अनुवाद | | कंस बोला, "दोनों ग्वालबाल यहाँ आये हैं। वे मेरे प्राण लेने वाले हैं, अतः तुम दोनों मेरे सामने ही कुश्ती में उनका वध कर दो। यदि तुम उन दोनों को कुश्ती में मारकर मुझे संतुष्ट कर दोगे, तो मैं तुम्हारी समस्त कामनाएँ पूर्ण करूँगा; मेरे इस कथन को मिथ्या मत समझो। तुम मेरे इन अत्यन्त बलशाली अपराधियों का, चाहे न्याय से या अन्याय से, अवश्य ही वध करो। उनके मर जाने पर यह सम्पूर्ण राज्य हम दोनों का ही होगा॥19-21॥ | | | | Kansa said, "Both the cowherd boys have come here. They are going to take my life, so both of you kill them in front of me in wrestling. If you satisfy me by killing both of them in wrestling, then I will fulfill all your desires; do not consider this statement of mine to be false. You must kill these very powerful offenders of mine, whether by justice or injustice. After their death, this entire kingdom will be common to both of us.॥19-21॥ | | ✨ ai-generated | | |
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