श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.20.16 
तत: पूरयता तेन भज्यमानं बलाद्धनु:।
चकार सुमहच्छब्दं मथुरा येन पूरिता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब उसने बड़े जोर से प्रत्यंचा खींचने का प्रयत्न किया तो धनुष टूट गया और उसने ऐसी भयंकर ध्वनि की कि सारा मथुरा उससे गूंज उठा॥16॥
 
When he was trying to pull the string with great force the bow broke and he made such a loud noise that the whole of Mathura resounded with it.॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas