श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.20.15 
आयागं तद्धनूरत्नं ताभ्यां पृष्टैस्तु रक्षिभि:।
आख्याते सहसा कृष्णो गृहीत्वापूरयद्धनु:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उन्होंने यज्ञरक्षकों से यज्ञ का उद्देश्यरूपी धनुष के विषय में पूछा और जब उन्होंने उसे बताया, तब श्रीकृष्णचन्द्र ने सहसा उसे उठाकर प्रत्यंचा पर चढ़ा दिया॥15॥
 
After reaching there, he asked the Yagya protectors about the bow as the purpose of the Yagya and when they told him, Shri Krishna Chandra suddenly picked it up and attached it to the string. 15॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas