| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध » श्लोक 103 |
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| | | | श्लोक 5.20.103  | स त्वं प्रसीद परमेश्वर पाहि विश्व-
मंशावतारकरणैर्न ममासि पुत्र:।
आब्रह्मपादपमिदं जगदेतदीश
त्वत्तो विमोहयसि किं पुरुषोत्तमास्मान्॥ १०३॥ | | | | | | अनुवाद | | हे परमेश्वर! आप हम पर प्रसन्न होकर अपने अंशावतार द्वारा जगत की रक्षा कीजिए। आप मेरे पुत्र नहीं हैं। हे प्रभु! ब्रह्मा से लेकर वृक्षों तक यह सम्पूर्ण जगत् आपसे ही उत्पन्न हुआ है, फिर हे पुरुषोत्तम! आप हमें क्यों मोह में डाल रहे हैं?॥103॥ | | | | O Supreme Lord! Please be pleased with us and protect the world through your partial incarnation. You are not my son. O Lord! Starting from Brahma to trees, this entire world has originated from you, then O Purushottama! Why are you tempting us?॥103॥ | | ✨ ai-generated | | |
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