श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  5.20.101 
जगदेतज्जगन्नाथ सम्भूतमखिलं यत:।
कया युक्त्या विना मायां सोऽस्मत्त: सम्भविष्यति॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
हे जगन्नाथ! आप ही हैं जिनसे यह सम्पूर्ण जगत उत्पन्न हुआ है, माया के बल के बिना आप हमसे कैसे उत्पन्न हो सकते हैं? ॥101॥
 
O Jagannath! You are the one from whom this entire universe has originated, how else can you be born from us without the power of Maya? ॥101॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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