श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.19.8 
तत्किमेतेन मथुरां यास्यामो मधुसूदन।
बिभेमि कंसाद्धिग्जन्म परपिण्डोपजीविनाम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे मधुसूदन! इस आश्चर्य के विषय में अधिक कहने से क्या लाभ? आओ, शीघ्र ही मथुरा पहुँचें; मुझे कंस का बड़ा भय है। दूसरों के दिए हुए अन्न पर निर्वाह करने वालों के जीवन को धिक्कार है!॥8॥
 
O Madhusudana! What is the use of saying more about this wonder? Come, let us reach Mathura soon; I am very afraid of Kansa. Shame on the life of those who live on food given by others!॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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