| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा » श्लोक 22 |
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| | | | श्लोक 5.19.22  | तत: प्रहृष्टवदनस्तयो: पुष्पाणि कामत:।
चारूण्येतान्यथैतानि प्रददौ स प्रलोभयन्॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | तत्पश्चात्, ‘देखो, ये बहुत सुन्दर हैं, ये बहुत सुन्दर हैं’ ऐसा कहकर प्रसन्न मुख से उन्हें लुभाते हुए उनकी इच्छानुसार पुष्प दिए॥22॥ | | | | Thereafter, enticing them with a cheerful face saying, 'Look, these are very beautiful, these are very beautiful', he gave them flowers as per their wish. ॥22॥ | | ✨ ai-generated | | |
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