श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.19.21 
प्रसादपरमौ नाथौ मम गेहमुपागतौ।
धन्योऽहमर्चयिष्यामीत्याह तौ माल्यजीवन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब माली बोला, "हे प्रभु! आप मेरे घर पधारे, यह आपकी बड़ी कृपा है। मैं धन्य हो गया, क्योंकि आज मैं आपकी पूजा कर सकूंगा।"
 
Then the gardener said, "O Lord! You are very kind to have come to my house. I am blessed because today I will be able to worship you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)