श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.19.14 
भ्रममाणौ ततो दृष्ट्वा रजकं रंगकारकम्।
अयाचेतां सुरूपाणि वासांसि रुचिराणि तौ॥ १४॥
 
 
अनुवाद
रास्ते में उसने एक रंगरेज को घूमते देखा और उससे कुछ सुंदर रंगीन कपड़े मांगे।
 
On the way, he saw a dyer walking around and asked him for some beautiful colourful clothes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)