श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.19.11 
गन्तव्यं वसुदेवस्य नो भवद्‍भ्यां तथा गृहम्।
युवयोर्हि कृते वृद्धस्स कंसेन निरस्यते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मथुरा पहुँचकर तुम्हें वसुदेवजी के घर नहीं जाना चाहिए क्योंकि तुम्हारे ही कारण कंस सदैव वृद्ध वसुदेवजी का अनादर करता है॥ 11॥
 
After reaching Mathura, you should not go to the house of Vasudevji because it is because of you that Kansa always disrespects the old Vasudevji.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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