श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.19.10 
विलोक्य मथुरां कृष्णं रामं चाह स यादव:।
पद्‍भ्यां यातं महावीरौ रथेनैको विशाम्यहम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मथुरापुरी को देखकर अक्रूरजी ने राम और कृष्ण से कहा, "हे वीरों! अब मैं अकेला ही रथ से जाऊँगा, तुम दोनों पैदल आओ।"
 
On seeing Mathurapuri, Akrur said to Rama and Krishna, "O brave men! Now I will go alone by chariot, you two may come on foot."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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