श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.19.1 
श्रीपराशर उवाच
एवमन्तर्जले विष्णुमभिष्टूय स यादव:।
अर्चयामास सर्वेशं धूपपुष्पैर्मनोमयै:॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - यदुकुलोत्पन्न अक्रूरजी ने जल में भगवान विष्णु की स्तुति की तथा मन में कल्पना की हुई धूप, दीप और पुष्पों से उन भगवान की पूजा की॥1॥
 
Shri Parasharji said - Yadukulotpanna Akrurji praised Lord Vishnu in the water and worshiped that Lord with incense, lamps and flowers as imagined in his mind. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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