न कल्पनामृतेऽर्थस्य सर्वस्याधिगमो यत:।
तत: कृष्णाच्युतानन्तविष्णुसंज्ञाभिरीडॺते॥ ५४॥
अनुवाद
क्योंकि कल्पना के बिना किसी भी वस्तु का ज्ञान नहीं होता, इसीलिए कृष्ण, अच्युत, अनन्त और विष्णु आदि नामों से आपकी स्तुति होती है [वास्तव में आपको किसी नाम से पुकारा नहीं जा सकता] ॥54॥
Because without imagination there is no knowledge of any object, that is why you are praised by the names Krishna, Achyuta, Ananta and Vishnu etc. [in fact you cannot be referred to by any name]. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥