vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह
»
श्लोक 51
श्लोक
5.18.51
प्रसीद सर्व सर्वात्मन् क्षराक्षरमयेश्वर।
ब्रह्मविष्णुशिवाख्याभि: कल्पनाभिरुदीरित:॥ ५१॥
अनुवाद
हे सब लोग! हे परमात्मा! हे अक्षरदेव! आप प्रसन्न होइए। ब्रह्मा, विष्णु और शिव स्वयं कल्पना द्वारा वर्णित हैं। 51॥
Hey all! Oh Supreme Soul! O God of alphabets! You be happy. Brahma, Vishnu and Shiva themselves are described through imagination. 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×