श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.18.49 
सर्वरूपाय तेऽचिन्त्य हविर्भूताय ते नम:।
नमो विज्ञानपाराय पराय प्रकृते: प्रभो॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे अचिन्त्य प्रभु! आप सर्वरूप और हविरूप परमेश्वर हैं, आपको नमस्कार है। आप बुद्धि से परे और प्रकृति से परे हैं; आपको बारंबार नमस्कार है ॥ 49॥
 
O inconceivable Lord! Salutations to you, the Supreme Being, who is all-form and the form of offerings. You are beyond the intellect and beyond nature; salutations to you again and again. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)