श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.18.29 
अनुरागेण शैथिल्यमस्मासु व्रजिते हरौ।
शैथिल्यमुपयान्त्याशु करेषु वलयान्यपि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
देखो! श्रीहरि का हमारे प्रति प्रेम कम हो जाने से हमारे हाथों के कंगन तुरन्त ढीले हो गए हैं॥29॥
 
See! Due to the waning of Shri Hari's love for us, the bracelets on our hands have instantly become loose. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)