श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.18.28 
अहो गोपीजनस्यास्य दर्शयित्वा महानिधिम्।
उत्कृत्तान्यद्य नेत्राणि विधिनाकरुणात्मना॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान! निर्दयी विधाता ने आज गोपियों को यह महान निधि दिखाकर उनकी आँखें निकाल लीं।
 
Oh! The ruthless Creator has today taken out the eyes of the Gopis after showing them this great treasure.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)