श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.18.27 
को नु स्वप्नस्सभाग्याभिर्दृष्टस्ताभिरधोक्षजम्।
विस्तारिकान्तिनयना या द्रक्ष्यन्त्यनिवारिता:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कौन जाने उन सौभाग्यवती स्त्रियों ने आज कौन-सा शुभ स्वप्न देखा है कि वे (मथुरा की) विशाल, तेजस्वी नेत्रों वाली स्त्रियाँ श्री अधोक्षज को स्वच्छंदता से देखेंगी?॥ 27॥
 
Who knows what auspicious dream have those fortunate ladies seen today that those women with large radiant eyes (of Mathura) will freely gaze at Sri Adhokshaja?॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)