श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.18.19 
एषैष रथमारुह्य मथुरां याति केशव:।
क्रूरेणाक्रूरकेणात्र निर्घृणेन प्रतारित:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
देखो, देखो! क्रूर और निर्दयी अक्रूर के प्रभाव से ये कृष्णचन्द्र रथ पर सवार होकर मथुरा जा रहे हैं॥19॥
 
Look, look! under the influence of the cruel and ruthless Akrura, this Krishnachandra is riding a chariot and going to Mathura. ॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)