vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह
»
श्लोक 15
श्लोक
5.18.15
विलासवाक्यपानेषु नागरीणां कृतास्पदम्।
चित्तमस्य कथं भूयो ग्राम्यगोपीषु यास्यति॥ १५॥
अनुवाद
नगर की पढ़ी-लिखी स्त्रियों की मधुर वाणी पर मोहित होकर फिर उसका मन अशिक्षित ग्वालिनों की ओर क्यों गया? ॥15॥
Having been enamoured with the sweet words of the [educated] women of the city, why did his mind then turn towards the uneducated milkmaids? ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×