श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.18.15 
विलासवाक्यपानेषु नागरीणां कृतास्पदम्।
चित्तमस्य कथं भूयो ग्राम्यगोपीषु यास्यति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
नगर की पढ़ी-लिखी स्त्रियों की मधुर वाणी पर मोहित होकर फिर उसका मन अशिक्षित ग्वालिनों की ओर क्यों गया? ॥15॥
 
Having been enamoured with the sweet words of the [educated] women of the city, why did his mind then turn towards the uneducated milkmaids? ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)