श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.18.10 
निशेयं नीयतां वीर न चिन्तां कर्त्तुमर्हसि।
त्रिरात्राभ्यन्तरे कंसं निहनिष्यामि सानुगम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! इस रात्रि को सुखपूर्वक बिताओ, किसी भी बात की चिन्ता मत करो। तीन रात्रि के भीतर मैं कंस को उसके अनुयायियों सहित अवश्य मार डालूँगा।
 
O brave one! Spend this night happily, do not worry about anything. Within three nights I will surely kill Kansa along with his followers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)